शनिवार, 22 नवंबर 2008

आज़ का इंसान

आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंजर क्यूँ है जखम हर सर पर हर हाथ में खंजर क्यूँ है
अपना अंजाम मालूम है सबको फिर भी अपनी नज़रों में हर इंसान सिकंदर क्यूँ है

7 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

बेनामी ने कहा…

Dear Sir
Greetings to You,
Avtar Meher Baba has given an ultimate great Mantra. He said
"Desire for Desirelessness." This mantra will solve all the problems.
Avtar Meher Baba ki Jai!!!
Dr. Chandrajiit Singh
chadnar30@gmail.com
mazedarindianfoodconcept.blogspot.com
avtarmeherbaba.blogspot.com
lifemazedar.blogspot.com
kvkrewa.blogspot.com

Unknown ने कहा…

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है, खूब लिखें, अच्छा लिखें… तरक्की करें… बहुत-बहुत शुभकामनायें…

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

बहुत बढिया पोस्ट लिखी है।बधाई।
हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है|शुभकामनायें|
जरुर पढें दिशाएं पर क्लिक करें ।

संगीता-जीवन सफ़र ने कहा…

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है।

Yamini Gaur ने कहा…

mind blowing.........keep going. congrates

संगीता पुरी ने कहा…

आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।